Brief History of Kangra District  कांगड़ा जिले का इतिहास 

काँगड़ा प्राचीन काल में त्रिगर्त के नाम से मशहूर था जिसकी स्थापना महाभारत युद्ध से पूर्व मानी जाती है। इस रियासत की स्थापना भूमि चंद ने की थी, जिसकी राजधानी मुल्तान (पाकिस्तान) थी।

इस वंश (पीढ़ी) के 234वें राजा सुशर्मा ने जालंधर त्रिगर्त के कांगड़ा में किले की स्थापना कर उसको अपनी राजधानी बनाया।

त्रिगर्त का अर्थ

त्रिगर्त का शाब्दिक अर्थ तीन नदियों रावी, व्यास और सतलुज के बीच फैले भू-भाग से है। बाणगंगा, कुराली और न्यूगल के संगम स्थल को भी त्रिगर्त कहा जाता है।

त्रिगर्त रियासत की राजधानी नगरकोट (वर्तमान काँगड़ा शहर) थी जिसे भीमकोट, भीम नगर और सुशर्मापुर के नाम से भी जाना जाता था। इस शहर की स्थापना सुशर्मा ने की थी।

काँगड़ा का अर्थ

काँगड़ा का अर्थ है कान का गढ़। भगवान शिव ने जब जालंधर राक्षस को मारा तो उसके कान जिस जगह गिरे वही स्थान कालांतर में काँगड़ा कहलाया।

गुलेर रियासत

गुलेर रियासत का पुराना नाम ग्वालियर था। काँगड़ा के राजा हरिचंद ने 1405 ई. में गुलेर रियासत की स्थापना हरिपुर में की जहाँ उसने शहर व किला बनवाया। हरिपुर किले को गुलेर किला भी कहा जाता है। हरिपुर गुलेर रियासत की राजधानी थी।

नूरपुर राज्य

नूरपुर का प्राचीन नाम धमेरी था। नूरपुर राज्य की पुरानी राजधानी पठानकोट (पैठान) थी। अकबर के समय में नूरपुर के राजा बासदेव ने राजधानी पठानकोट से नूरपुर बदली। प्राचीन काल में नूरपुर और पठानकोट औदुंबर क्षेत्र के नाम से जाना जाता था।

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