हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक-2022

हिमाचल प्रदेश सरकार ने बड़े पैमाने पर धर्मांतरण की प्रक्रिया का अपराधीकरण करने की मांग करते हुए हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2022 का प्रस्ताव दिया है।

हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक-2022

विधेयक द्वारा हिमाचल प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2019 में संशोधन किया गया, जिसे एक धर्म से दूसरे धर्म में धर्मांतरण पर रोकने के उद्देश्य से अधिनियमित किया गया था।

हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक-2022

हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2019 अनुचित टिप्पणी, बल, अनुचित प्रभाव, ज़बरदस्ती, प्रलोभन या किसी अन्य कपटपूर्ण तरीके से या शादी से और उससे जुड़े मामलों के लिये एक धर्म से दूसरे धर्म में धर्मांतरण को प्रतिबंधित करता है।

हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक-2022

प्रस्तावित संशोधन

इस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय होंगे।

हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक-2022

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

यह सामूहिक धर्मांतरण को एक ही समय में दो या दो से अधिक व्यक्तियों के धर्मांतरण के रूप में परिभाषित करता है।

हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक-2022

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

यदि कोई व्यक्ति सामूहिक धर्म परिवर्तन के संबंध में धारा 3 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो सज़ा को अधिकतम 10 वर्ष तक बढ़ाने और जुर्माने की राशि में वृद्धि का प्रस्ताव किया गया है।

हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक-2022

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

प्राप्त शिकायतों की जाँच किसी ऐसे पुलिस अधिकारी द्वारा की जानी चाहिये जो सब-इंस्पेक्टर के पद से नीचे का न हो।

हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक-2022

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

यदि कोई व्यक्ति अपने धर्म को छुपाकर किसी से विवाह करता है और उसके पश्चात अपने धर्म के अनुपालन का दबाव बनाता है तो उसे न्यूनतम तीन वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष के कारावास की सज़ा दी जाएगी।

हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक-2022

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

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