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हिमाचल प्रदेश के गलेशियर

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हिमाचल प्रदेश के गलेशियर (Glaciers of Himachal Pradesh)

हि.प्र. में ग्लेशियर को स्थानीय भाषा में ‘शिगड़ी’ कहते हैं। ग्लेशियर को हिमनद के नाम से भी जाना जाता है। ग्लेशियर नदियों को पानी देते हैं व नदियों के उद्गम का प्रमुख स्रोत हैं।

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Glaciers of Himachal Pradesh

लाहौल का बड़ा शिगड़ी हिमनद (Bara Shigri Glacier)

यह वह हिमनद है जिससे चंद्रा नदी को पानी मिलता है। हिमाचल प्रदेश में स्थित यह सबसे बड़ा हिमनद है, जिसकी लम्बाई लगभग 25 किलोमीटर तथा चौड़ाई लगभग 3 किलोमीटर है। यह मुख्य हिमालय के मध्य की ढलान पर स्थित है। छोटे-छोटे अन्य ग्लेशियर इस ग्लेशियर को सिंचित करते हैं।

बड़ा शिगड़ी ग्लेशियर का पूरा क्षेत्र बंजर तथा बिना किसी प्राकृतिक उपज के है। कहा जाता है कि वर्ष 1936 में इस ग्लेशियर ने चंद्र घाटी में भारी तबाही मचाई थी, जिसके परिणामस्वरूप बाद में चंद्रताल झील का निर्माण हुआ।

सन 1956 में पहली बार कुछ महिला पर्वतारोहियों ने इस पर विजय प्राप्त की। इसके बाद 1958 में स्टीफेन्सन तथा 1970 में मेजर बलजीत सिंह ने सफलतापूर्वक बड़ा शिगड़ी ग्लेशियर का भ्रमण किया।

वर्ष 1957 में भारतीय भू-गर्भ सर्वेक्षण संस्थान के तत्वावधान में जी. एन. दत्त तथा एफ. अहमद द्वारा इस ग्लेशियर के अध्ययन की शुरुआत की गई।

चंद्रा हिमनद (Chandra Glacier)

चंद्रा हिमनद (Chandra Glacier): यह ग्लेशियर मुख्य हिमालय की ढलान पर हिमाचल प्रदेश के जिला लाहौल में स्थित है। इस हिमनद के कारण चंद्रताल झील का निर्माण हुआ है तथा यह संभवतः बड़ा शिगड़ी ग्लेशियर से ही अलग हुआ है।

यह ग्लेशियर चंद्रा और भागा नदियों को सिंचित करता है, जो आगे चलकर मिलकर चिनाब नदी का रूप धारण करती हैं।

पार्वती ग्लेशियर

पार्वती ग्लेशियर से पार्वती नदी को पानी मिलता है। यह ग्लेशियर कुल्लू जिले में स्थित है। इस ग्लेशियर की लंबाई 15 किमी. है।

दुधोन ग्लेशियर

दुधोन ग्लेशियर से पार्वती नदी को पानी मिलता है। यह ग्लेशियर कुल्लू जिले में स्थित है। इस ग्लेशियर की लंबाई 15 किमी. है।

मुल्कीया ग्लेशियर

यह ग्लेशियर लाहौल स्पीति में स्थित है। इस ग्लेशियर से भागा नदी को जल मिलता है। इस ग्लेशियर की लंबाई 12 किमी. है। यह ग्लेशियर 6478 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।

मियार ग्लेशियर

यह ग्लेशियर लाहौल स्पीति में स्थित है। इस ग्लेशियर से मियार नदी को जल मिलता है। इस ग्लेशियर की लंबाई 12 किमी. है।

व्यासकुण्ड ग्लेशियर- रोहतांग के पास इससे व्यास नदी को पानी मिलता है।

कुल्टी ग्लेशियर

कुल्टी ग्लेशियर- कुल्टी ग्लेशियर कोकसर के निकट स्थित है। मिलांग ग्लेशियर दारचा और खेबराड़ के मध्य स्थित है। तारागिरि ग्लेशियर भी मिलांग ग्लेशियर के निकटवर्ती है। मिलांग ग्लेशियर पर सर्वप्रथम सन 1939 में राष्ट्रीय छात्र संघ के सदस्यों ने विजय प्राप्त की थी।

भादल ग्लेशियर

भादल ग्लेशियर- यह ग्लेशियर पीर पंजाल श्रृंखला की दक्षिण-पश्चिम ढलान पर जिला कांगड़ा के बड़ा भंगाल क्षेत्र में स्थित है। भादल नदी इसी ग्लेशियर द्वारा सिंचित होती है, जो रावी नदी की एक बड़ी सहायक नदी है।

इस ग्लेशियर का धरातल बड़ी-बड़ी चट्टानों तथा अन्य हिमनद खंडों से भरा पड़ा है। शरद ऋतु में भारी हिमपात के कारण यह ग्लेशियर अपना बड़ा आकार बना लेता है, जबकि ग्रीष्म ऋतु में चरवाहे आसानी से यहाँ तक पहुँच जाते हैं।

गेफांग ग्लेशियर

गेफांग ग्लेशियर- गेफांग ग्लेशियर का नामकरण लाहौल घाटी के प्रसिद्ध देवता गेफांग के नाम पर किया गया है, जिनका सराहन में एक मंदिर भी है। गेपंग चोटी स्विट्जरलैंड की मैटरहॉर्न चोटी से मेल खाती है, जो वर्ष भर बर्फ से ढकी रहती है। स्थानीय लोग इसे लाहौल घाटी का मणिमहेश भी कहते हैं।

भागा हिमनद (Bhaga Glacier)

भागा हिमनद (Bhaga Glacier): यह ग्लेशियर भी जिला लाहौल में मुख्य हिमालय की ढलान पर स्थित है। इस हिमनद से भागा नदी का उद्गम होता है।

इस ग्लेशियर के चारों ओर बर्फ से ढकी ऊँची-ऊँची चोटियाँ हैं। यहाँ तक पहुँचने के लिए कोकसर और तांदी (जिला लाहौल) का मार्ग अपनाया जाता है।

इसकी लंबाई 25 किलोमीटर है।

पत्तन घाटी में स्थित अन्य ग्लेशियर हैं—

  • शिल्पा
  • कुकटी
  • लंगर
  • धोकसा
  • नीलकुण्ड

भागा घाटी के प्रमुख ग्लेशियर हैं—

  • मिलांग
  • मुक्किला
  • लेडी ऑफ केलांग
  • गंगस्तांग

चंद्रनाहन हिमनद (Chandranahan Glacier)

चंद्रनाहन ग्लेशियर मुख्य हिमालय की दक्षिण-पूर्वी ढलान में जिला शिमला के रोहड़ू क्षेत्र के उत्तर-पश्चिम में स्थित है।

यह ग्लेशियर पब्बर नदी को सिंचित करता है। कई अन्य छोटे-छोटे ग्लेशियर भी चंद्रनाहन ग्लेशियर के साथ जुड़े हुए हैं।

इस ग्लेशियर के समीप ही चंद्रनाहन झील स्थित है। इसके चारों ओर बर्फ से ढकी ऊँची-ऊँची चोटियाँ हैं, जिनकी ऊँचाई 6000 मीटर या उससे अधिक है।

‘केलांग की महिला’ हिमनद (The Lady of Keylong Glacier)

यह ग्लेशियर 6061 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है तथा केलांग कस्बे से बड़ी आसानी से देखा जा सकता है। यह ग्लेशियर पर्यटकों में काफी लोकप्रिय है।

इसका नामकरण ‘द लेडी ऑफ केलांग’ एक अंग्रेज महिला पर्वतारोही लेडी एलफिनस्टोन द्वारा लगभग सौ वर्ष पूर्व (19वीं शताब्दी में) अंग्रेजी शासन के समय किया गया था।

यह ग्लेशियर वर्ष भर बर्फ से ढका रहता है। वर्ष के मध्य काल में कुछ बर्फ पिघलने पर इसकी आकृति एक महिला की तरह दिखाई देती है, जो अपनी पीठ पर भार उठाए हुए हो।

भारतीय भू-सर्वेक्षण संस्थान के पास भी यह ‘लेडी ऑफ केलांग’ के नाम से ही पंजीकृत है।

गोरा हिमनद (Gora Glacier)

यह हिमनद हिमाचल प्रदेश के मुख्य हिमालय की दक्षिणी ढलान पर स्थित है।

भारी जनसंख्या दबाव तथा बदलते पर्यावरण के कारण यह ग्लेशियर काफी हद तक सिकुड़ गया है।

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